किसानों का स्वास्थ्य बिगड़ने से टूट सकती है अर्थव्यवस्था की कमर
किसानों का स्वास्थ्य बिगड़ने से टूट सकती है अर्थव्यवस्था की कमर
कोरोना की दूसरी लहर का सबसे घातक असर गांवों पर ही देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र सहित देश के 12 से ज्यादा राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना कहर बनकर टूटा है। किसान-मजदूर भारी संख्या में बीमार हो रहे हैं और कोरोना के कारण गांवों में मौत बढ़ी है। विशेषज्ञों को आशंका है कि इसके कारण कृषि उत्पादन में कमी आ सकती है।किसानों और मजदूरों के बीमार पड़ने से धान की बुवाई पर असर पड़ सकता है। श्रमिकों में संक्रमण गहराने से वे कामकाज के लिए अन्य राज्यों को नहीं जा सकेंगे, इससे पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों में कृषि क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की कमी हो सकती है। कृषि के सकल उत्पादन पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।

अगर कृषि उत्पादन पर्याप्त मात्रा में नहीं हुआ तो किसानों के हाथ में पैसा कम पहुंचेगा और वे कम खरीदारी करेंगे और इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में कमी आ सकती है। इसी समय ग्रामीण क्षेत्रों में एफएमसीजी उत्पादों की मांग में कमी आ चुकी है। अगर कोरोना की स्थिति नहीं संभली और शादियों के सीजन पर भी इसका असर पड़ा तो भविष्य में यह असर और अधिक गहरा सकता है।

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