आज का पंचांग
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🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞


⛅ *दिनांक 23 मई 2021*


⛅ *दिन - रविवार*


⛅ *विक्रम संवत - 2078 (गुजरात - 2077)*


⛅ *शक संवत - 1943*


⛅ *अयन - उत्तरायण*


⛅ *ऋतु - ग्रीष्म* 


⛅ *मास - वैशाख*


⛅ *पक्ष - शुक्ल* 


⛅ *तिथि - एकादशी सुबह 06:42 तक तत्पश्चात द्वादशी*


⛅ *नक्षत्र - हस्त दोपहर 12:12 तक तत्पश्चात चित्रा*


⛅ *योग - सिद्धि दोपहर 02:58 तक तत्पश्चात व्यतिपात*


⛅ *राहुकाल - शाम 05:34 से शाम 07:13 तक* 


⛅ *सूर्योदय - 05:59* 


⛅ *सूर्यास्त - 19:11*


⛅ *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में*


⛅ *व्रत पर्व विवरण - त्रिस्पृसा-मोहिनी एकादशी (भागवत), द्वादशी क्षय तिथि*


 💥 *विशेष - हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है  https://youtu.be/n28XhkKVKGk  राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*


💥 *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*


💥 *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*


💥 *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*


💥 *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*


               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *मोहिनी एकादशी* 🌷


🙏🏻 *मोहिनी एकादशी ( उपवास से अनेक जन्मों के मेरु पर्वत जैसे महापापों का नाश )*


🙏🏻 *ऋषिप्रसाद – अप्रैल २०१९ से*
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🌷 *वैशाख मास की महापुण्यप्रद अंतिम तीन तिथियाँ*


🙏🏻 *श्रुकदेवजी राजा जनक से कहते हैं : ‘‘राजेन्द्र ! वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में जो अंतिम तीन पुण्यमयी तिथियाँ हैं – त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा । ये बडी पवित्र व शुभकारक हैं । इनका नाम ‘पुष्करिणी है, ये सब पापों का क्षय करनेवाली हैं । पूर्वकाल में वैशाख शुक्ल एकादशी को शुभ अमृत प्रकट हुआ । द्वादशी को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की । त्रयोदशी को उन श्रीहरि ने देवताओं को सुधा-पान कराया । चतुर्दशी को देवविरोधी दैत्यों का संहार किया और पूर्णिमा के दिन समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य प्राप्त हो गया ।*


🙏🏻 *इसलिए देवताओं ने संतुष्ट होकर इन तीन तिथियों को वर दिया : ‘वैशाख की ये तीन शुभ तिथियाँ मनुष्यों के पापों का नाश करनेवाली तथा उन्हें पुत्र-पौत्रादि फल देनेवाली हों ।*


🙏🏻 *जो संम्पूर्ण वैशाख में प्रातः पुण्यस्नान न कर सका हो, वह इन तिथियों में उसे कर लेने पर पूर्ण फल को ही पाता है । वैशाख में लौकिक कामनाओं को नियंत्रित करने पर मनुष्य निश्चय ही भगवान विष्णु का सायुज्य प्राप्त कर लेता है ।*


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🌷 *व्यतिपात योग* 🌷


🙏🏻 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*


🙏🏻 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*


🙏🏻 *व्यतिपात योग माने क्या कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुऐ नाराज हुऐ, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि कैसा गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना नही थोडा भूल रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाता है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*


💥 *विशेष ~ 23 मई 2021 रविवार को दोपहर 02:59 से 24 मई, सोमवार को सुबह 11:14 तक व्यतिपात योग है।*


🙏🏻 *कथा स्रोत - बडोदा २००८ में १२ नवम्बर को सुबह के दीक्षा सत्र में (स्वामी सुरेशानन्द जी के सत्संग से)*

📖 *हिन्दू पंचांग संपादक ~ अंजनी निलेश ठक्कर*


📒 *हिन्दू पंचांग प्रकाशित स्थल ~ सुरत शहर (गुजरात)*


              🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞


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