कान्हा के जन्म पर बन रहा यह दुर्लभ संयोग
 दुर्लभ संयोग

 देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जा रही है. भगवान कृष्ण के मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी हुई है और उन्हें भव्य तरीके से सजाया गया है. ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक, इस बार जन्माष्टमी पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है. ये संयोग 101 साल बाद पर बन रहा है. इस साल इसी जयंती योग में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है. श्रीमद्भागवत पुराण के मुताबिक, भगवान श्रीकृष्ण जी का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, दिन सोमवार, रोहिणी नक्षत्र व वृष राशि में मध्य रात्रि में हुआ था.

इस दिन लोग दिन में व्रत रखते रात में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करते हैं. श्रद्धालु हर वर्ष उत्साह से यह त्योहार मनाते हैं लेकिन इस बार कुछ खास है. दरअसल, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में शुल्क पक्ष की अष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इस साल जन्माष्टमी पर विशेष संयोग बन रहा है. इस बार 27 साल बाद यह पहला मौका है जब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा. इस बार भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि 29 अगस्त की रात 11:27 बजे से 30 अगस्त की रात 1.59 बजे तक ही रहेगी. इसके बाद 30 अगस्त की सुबह 6:38 मिनट से 31 अगस्त सुबह 9.43 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा. पिछले 27 साल से स्मार्त औऱ वैष्णव की अलग-अलग जन्माष्टमी होती थी लेकिन ऐसा इस बार नहीं है. दरअसल, वैष्णव उदयातिथि से स्मार्त वर्तमान तिथि को मानते हैं.

ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक, इस बार भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सोमवार 30 अगस्त, भाद्र मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जा रही है. इस दौरान चंद्रमा वर्ष राशि में रहेंगे. रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश भी 30 अगस्त को सुबह 6 बजकर 49 मिनट पर शुरु हो चुका है और अष्टमी तिथि भी सोमवार की मध्यरात्रि 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगी. उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी. इस प्रकार से देखें तो अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और सोमवार दिन तीनों का एक साथ मिलना दुर्लभ है. ज्योतिषीय गणना के मुताबिक ये संयोग 101 साल बाद यानी दुर्लभ संयोग बना है.

पंचांग के मुताबिक़, अष्टमी तिथि 29 अगस्त को रात्रि 10 बजकर 10 मिनट पर लग जाएगी. ऐसे में इस बार की जन्माष्टमी पर बन रहे इन कई विशिष्ट संयोगों के कारण बेहद खास है. ऐसी मान्यता है कि ऐसे विशिष्ट योग में जन्माष्टमी की पूजा विधि-विधान पूर्वक करने पर भगवान कृष्ण की भक्तों पर अपार कृपा होती है. इससे भक्तों की सारी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं.

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