मंदी की मार झेल रहे गया के छोटे व्यापारियों को पितृपक्ष मेले से आस
मंदी की मार झेल रहे गया के छोटे व्यापारियों को पितृपक्ष मेले से आस

गया। पिछले साल कोरोना संकट के कारण पितृपक्ष मेले का आयोजन नहीं हो पाया था। इस वर्ष इससे जुड़े लोगों को बहुत उम्मीदें थीं, पर अभी तक जिला प्रशासन चुप्पी साधे है। इससे पंडा समाज से लेकर व्यापार से जुड़े लोगों को बड़ा नुकसान होगा। पितृपक्ष के 17 दिनों के मेले में अनुमानत: सौ करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। पितृपक्ष में पिंडदान के लिए देश के अलावा विदेश से भी तीर्थयात्री आते हैं।

किसी जमाने में 365 पिंडवेदियां हुआ करती थीं, जिसमें से अब कई लुप्त हो चुकी हैं। उसमें से मात्र 55 से 60 पिंडवेदी बची हैं। जहां पिंडदानी अपने पितरों के मोक्ष के लिए पिंडदान करते हैं। मेले को लेकर लोगों में अभी असमंजस बना है, क्योंकि पितृपक्ष मेले के आयोजन को लेकर अभी जिला प्रशासन की बैठक नहीं हुई है, जबकि पितृपक्ष शुरू होने में कुछ ही दिन अब शेष रह गए हैं।

पितृपक्ष में मेला लगने का सभी इंतजार करते हैं, जिसमें गयापाल पुरोहित के अलावा होटल व्यवसायी, बर्तन व्यवसायी, कपड़ा व्यवसायी सहित आटो चालक, रिक्शा चालक, बस संचालक आदि हैं। पितृपक्ष में उक्त लोगों को मेले से गाढ़ी कमाई होती है। मेला में आए तीर्थयात्रियों का भी कारोबार से सीधा ताल्लुक है। यातायात में रेल, बस आटो व कार महत्वपूर्ण हैं।

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