कैसे प्राप्त करे माँ दुर्गा की कृपा

कैसे प्राप्त करे माँ दुर्गा की कृपा

राजसत्ता पोस्ट

कैसे प्राप्त करे माँ दुर्गा की कृपा

संसार में सबसे छोटा या सबसे आसान बोलने वाला रिश्ता है।जो सबसे पहले बच्चा आसान तरीके से शुद्ध बोल पाता है। तो वो संबंध माँ का है।माँ शब्द दो अक्षर का बना है। लेकिन उस में सारा ब्रह्माण्ड समाया हुआ है।पूराी सृष्टि संसार इस माँ का गुणगान करती है । गाय का बछडा -बछडी भी माँ -माँ बोल कर अपनी माँ को खोजता है।कितना बढिया है ना। वास्तव में माँ का रिश्ता जो किसी भी शुभ कार्य में भी बोला जाता है। हे माँ तेरी सदा ही जय हो।
अब हम उसी माँ दुर्गा, शेरा वाली के बारे आप को बताने की कोशिश माँ दुर्गा की कृपा से कर रहे है।माँ दुर्गा का एक नाम जगतजननी भी है।पूरे विश्व की जननी (माँ) सृष्टि रचयिता। दुर्गा माँ की शक्ति प्रदान करने वाली होती हैं और उन्हें प्रसन्न कर हम शक्ति सम्पन्न और विजय दिलवाने वाली प्रत्येक कार्य में सिद्धि देने वाली यश, किर्ति, हर स्थान में मान-सम्मान प्रतिष्ठा दिलवाने वाली होती है।माँ भवानी की पूजा इस में कोई शक नहीं है।माँ की पूजा करनी बहुत मुश्किल होती है। हर मनुष्य माँ वैष्णवी की पूजा नही कर सकता। क्योंकि ये भी कह सकते है। कि माँ गौरा गिरीजा को बहुत शुद्ध स्थान, शुद्ध आसन, शुद्ध भोग,शुद्ध आचरण चाहिए।
कहीं लोगों के मन में इस प्रकार के प्रशन आते है। कि हम मंत्र तो जानते नही और श्लोक भी नही अब हम क्या करें नवरात्रे भी चल रहे है। और मन यह भी कर रहा की दुर्गा देवी माँ की पूजा- उपासना-आराधना कैसे करू क्योंकि मेरे आराध्य देव इष्ट देवी है।मैं इन की पूजन कैसे करू कैसे देवी मईया को प्रसन्न करू ताकि हम से हमारे परिवार से खुश हो जाये।और अपनी कृपा दृष्टि करना शुरू कर दे हमारे समस्त परिवार के ऊपर अपना आशीर्वाद रूपी हाथ ऊपर रख दे।ताकि हम सब बिना विघ्न वाधाओ के अपने समस्त कार्य सफल कर सके।हम भी आप को ये ही बताने का प्रयास कर रहे है।कि भगवती दुर्गा का पूजन कैसे करे। अगर आप पूजा मंत्र -श्लोक नही पड पाते तो हम आपकी मन की समस्या को दूर करने माँ चिंतपूर्णी दुर्गा जी के बत्तीस नामो के बारे मे बताने जा रहे है। इन बारह नामो का नित्य दिन पाठ कर के पढ कर अपना उज्ज्वल भविष्य कर सकते है। आप लोगों को जो नाम जपने हैै। हम उसके बारे में बता रहे है। आप को दुर्गा मईया के बत्तीस नामो का प्रत्येक दिन एक साथ पढना और बोलना है
सबसे पहला नाम है। 1 दुर्गा , 2 दुर्गार्तिशमनी, 3 दुर्गापद्विनिवारिणी , 4 दुर्गमच्छेदिनी, 5 दुर्गसाधिनी, 6 दुर्गनाशिनी, 7 दुर्गतोद्धारिणी, 8 दुर्गनिहन्त्री, 9 दुर्गमापहा, 10 दुर्गमज्ञानदा, 11 दुर्गदैत्यलोकदवानला, 12 दुर्गमा, 13 दुर्गमालोका, 14 दुर्गमात्मस्वरूपिणी, 15 दुर्गमार्गप्रदा, 16 दुर्गमविद्या, 17 दुर्गमाश्रिता, 18 दुर्गमज्ञानसंस्थाना, 19 दुर्गमध्यानभासिनी, 20 दुर्गमोहा, 21 दुर्गमगा, 22 दुर्गमार्थस्वरूपिणी, 23 दुर्गमासुरसंहन्त्री, 24 दुर्गमायुधधारिणी, 25 दुर्गमाङ्गी, 26 दुर्गमता, 27 दुर्गम्या, 28 दुर्गमेश्वरी, 29 दुर्गभीमा, 30 दुर्गभामा, 31 दुर्गभा, 32 दुर्गदारिणी
ये है बत्तीस नाम माँ दुर्गा के जिन्हें हम रोज पढ कर माँ शक्ति की भक्ति और कृपा प्राप्त होती है। अब हम आप को जगदंबा को पूजा में क्या क्या चढाये। ये भी आप के मन में हो रहा होगा। उसी के बारे मे आप को बताने जा रहे हैं।
माता रानी को आप पूजा के समय निम्न सामग्री चढा सकते हो। पानी वाला नारियल, (1), सुपारी (3), लौंग,(1पैकेट),इलायची(1पैकेट),रोली( 1पैकेट), मोली (1गोली) साबूत चावल (225 ग्राम), गुलाब( लाल रंग),देशी घी (200ग्राम), रूई(1पैकेट),पंच मेवा(काजू,बादाम,छुवारे,किशमिश, मखाने,250ग्राम),पंचम मिठाई (पेडे250ग्राम) फल अनार(1किलो ग्राम), धूप -अगरबत्ती(1-1पैकेट) मिश्री दाना(225ग्राम) पीतल का दीया ( 1 ) भगवती श्रृंगार ( कांच की चिडिया, बिंदी, सिंदूर, सैंट),चुन्नी लाल (। ) दक्षिणा(श्रद्धा अनुसार 1का सिक्का मिला कर )
ये सामग्री आप दुर्गा जी को शुक्रवार के दिन और नवरात्रो के दिन पहले नवरात्रे में या अष्टमी, नवमी वाले नवरात्रे के दिन चढाना चाहिये। माँ दुर्गा जी बत्तीस नामो का नाम जप के फिर यह सामग्रियों बहुत शुद्ध होकर श्रद्धा से चढाये। ये जो देवी माँ को चढाने वाली सामग्री है।किसी भी शेरा वाली माता के मंदिर में यहा पार्वती माता के मंदिर में चढाना चाहिये। बिशेषकर यह सामग्री सौभाग्यवती स्त्रियाँ के लिए उनकी सुहाग की रक्षा और उनके परिवार की समस्या जैसे की नौकरी न लगना, विद्या में सफल न होना,संतान सुख न मिल पाना, स्वास्थ्य उत्तम न रहना घर में कलेश रहना इत्यादि कोई भी बाधा हो माँ ज्वाला, चन्द्रबदनी,दुर्गा, देवी माँ की पूजा करके या शुक्लपक्ष की अष्टमी को व्रत रखना बहुत लाभकारी, संकट,अमंगल, अनिष्ट, रोगो को दूर करने वाला होता है। लेकिन हमें पहले अपने मन-हृदय के अंदर माँ आदि शक्ति दुर्गा के प्रति आस्था, श्रद्धा, विश्वास जागृत करे।फिर देखो महामायी कैसे अपनी कृपा आप के ऊपर करना शुरू करेगी। आप की खुशी से भी या ये भी कह सकते है।कि सोच उमीद से भी जादा सोचने से पहले ही आप को वो सब मिल जायेगा जिस के लिए आप कोशिश कर थे।आप के सब रास्ते खुल जायेगे। और बिगडी बन जायेगी। प्रेम से जय कारा बोल कर के तो देखो।जय कारा शेरा वाली का बोल साचे दरवार की जय,सारे बोलो जय माता दी।
मैं आप लोगों को यही बता रहा हूँ। कि माँ शक्ति की पूजा में जो भाव आते है।वो वही आप को बत्ता सकता जो माँ की भक्ति -ध्यान -आराधना करता है।कह सकते है। कि जैसे एक बालक को जब उसकी माँ न दिखे तो वो रोता है।मायूस होता है।इसी प्रकार जब माँ की भक्ति किसी को मिल जाये।तो वो वी उसी बालक की तरह हो जाता है।जो माँ के ना दिखाने पर विलाप करता है।जो ये विलाप करना रोना ही तो भक्ति हो। जिस दिन वह किसी कारणवश वह देवी की पूजा नही कर पाता है।उस दिन उसको किसी भी काम को करने का मन नहीं करता और उदासी सी बनी रहती है।यही तो माँ की कृपा है।जो हर एक को नही प्राप्त हो पाती जय माँ चन्द्रबदनी की।

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