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गन्ना विकास विभाग की साढ़े तीन वर्षों की उपलब्धियां

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गन्ना विकास विभाग की साढ़े तीन वर्षों की उपलब्धियां

मुजफ्फरनगरः 24 दिसम्बर, 2020

1. प्रदेश के चीनी एवं गन्ना सेक्टर का योगदान

 गन्ना एक महत्वपूर्ण नगदी फसल है तथा प्रदेश मे लगभग 45.44 लाख गन्ना आपूर्तिकर्ता किसान है। लगभग 67 लाख गन्ना किसान, गन्ना समितियों एवं चीनी मिल समितियों मे पंजीकृत हैं।गन्ना इन 67 लाख गन्ना किसानों के लगभग 3 करोड 35 लाख परिवारीजनांे की जीविका का आधार एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
 गन्ना सेक्टर का, प्रदेश की कुल जी.डी.पी. में 8.45 प्रतिशत एवं कृषि क्षेत्र की जी.डी.पी. में 20.18 प्रतिशत का योगदान।
 देश के कुल चीनी उत्पादन का 47 प्रतिशत एवं गन्ना क्षेत्रफल का 59 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश का है।
 गन्ना एवं चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश लगातार 03 वर्षों से देश में प्रथम स्थान पर है।
 एथनाॅल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के लिए आॅयल कम्पनियों को एथनाॅल की आपूर्ति में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य। वर्ष 2019-20 में लगभग 70 करोड़ ली. की एथनाॅल आपूर्ति की गयी है।

2. गन्ना किसानों को गन्ना मूल्य का ऐतिहासिक भुगतान
 वर्तमान सरकार के मात्र साढ़े तीन वर्षों के कार्यकाल में रिकाॅर्ड
रू.1,12,829 करोड से अधिक का भुगतान हुआ है, जो अब तक इतनी कम अवधि में किये गये भुगतान में सर्वाधिक है।
 सरकार द्वारा विगत साढे तीन वर्ष की अवधि मे किसानों को कराया गया कुल रू.1,12,829 करोड का यह गन्ना मूल्य भुगतान इसके पूर्व के 03 वर्षों के सम्मिलित गन्ना मूल्य भुगतान रू.53,367 करोड़ से रू.59,462 करोड़ अधिक तथा 05 वर्षों के सम्मिलित गन्ना मूल्य भुगतान रू.95,215 करोड़ से रू.17,614 करोड अधिक है।

3. लाॅक डाउन अवधि के दौरान गन्ना मूल्य भुगतान
 लाॅकडाउन अवधि में चीनी मिलों में चीनी बिक्री आदि अत्यंत कम हो जाने के बावजूद इस अवधि में भी गन्ना किसानों को रू.5,954 (पाँच हजार नौ सौ चैवन करोड़) का भुगतान किया गया

4.नई चीनी मिलों की स्थापना
 किसान की खुशहाली में गन्ने के योगदान एवं रोजगार सृजन को दृष्टिगत रखते हुए सरकार द्वारा पूर्वांचल की बंद पड़ी निगम क्षेत्र की चीनी मिल पिपराईच-गोरखपुर एवं मुण्डेरवा-बस्ती में 5,000 टी.सी.डी. क्षमता की नई मिल का निर्माण किया गया।
 पिपराइच चीनी मिल में भारत सरकार के एथेनॉल ब्लैन्डिंग कार्यक्रम के अन्तर्गत 120 के.एल.पी.डी. क्षमता की आसवनी भी स्थापित की जायेगी, जिसमें गन्ने के जूस एवं शीरे से एथेनॉल उत्पादन किया जायेगा। यह प्रदेश में गन्ने के जूस पर आधारित एथेनॉल उत्पादित करने वाला प्रथम प्लांट होगा।
 पिपराईच एवं मुण्डेरवा चीनी मिलों में सल्फरलेस प्लांट की स्थापना लाॅक डाउन की अवधि के बावजूद 08 माह की रिकॉर्ड अवधि में की गयी है।इससे उच्च गुणवत्ता की चीनी का उत्पादन सुनिश्चित हो सकेगा तथा इसके विक्रय से चीनी का और अधिक मूल्य प्राप्त होगा एवं गन्ना मूल्य का भुगतान भी समय से किया जा सकेगा।

5. चीनी मिलों का पेराई क्षमता विस्तार एंव पुर्नसंचालन
 सहकारी क्षेत्र की रमाला चीनी मिल (बागपत) की पेराई क्षमता 2,750 से 5,000 टी.सी.डी एवं निगम क्षेत्र की मोहिद्दीनपुर (मेरठ) की पेराई क्षमता 2,500 से 3,500 टी.सी.डी. की गई, जिससे किसानों के अतिरिक्त गन्ने की आपूर्ति सुगमता पूर्वक हो सके।
 गन्ने की उपलब्धता को देखते हुए निजी क्षेत्र की 11 चीनी मिलों यथा-निगोही, ऊन, शामली, टिकोला, हरियांवा, बिलारी, वीनस, अगवानपुर, मोतीनगर, करीमगंज एवं बिसवां की पेराई क्षमता बढ़वायी गई, जिससे चीनी मिलों की पेराई क्षमता में 20,600 टी.सी.डी. की वृद्धि हुई।
 नई चीनी मिलों एवं पेराई क्षमता विस्तार से प्रदेश की चीनी मिलों की कुल पेराई क्षमता में 29,250 टी.सी.डी. की वृद्धि हुई।
 वर्ष 2011-12 से बंद पड़ी निजी क्षेत्र की चीनी मिलों वीनस (संभल), गागलहेड़ी (सहारनपुर) एवं वर्ष 2015-16 मे बंद हुई बुलन्दशहर (बुलन्दशहर) चीनी मिल का पुर्नसंचालन कराया गया।
 पूर्व वर्षों में कुल 30 चीनी मिलें बंद हुई थीं, जबकि वर्तमान सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की 03 बंद चीनी मिलों का पुनः संचालन कराया गया एवं निगम क्षेत्र की 02 बंद चीनी के स्थान पर 5,000 टी.सी.डी. की नई चीनी मिलों की स्थापना की गई।
 सहकारी क्षेत्र की 02 चीनी मिलों सठियांव एवं नजीबाबाद में डिस्टिलरी एवं एथनाॅल प्लांट की स्थापना की गई।
 सहकारी क्षेत्र की 06 आसवनियों में जेड.एल.डी. की स्थापना कर पुर्नसंचालन कराया गया तथा 06 मिलों में तकनीकी अपग्रेडेशन किये गये।
 देश में वर्ष 2018-19 मे 529 चीनी मिलें संचालित हुई थी, जबकि वर्ष 2019-20 में मात्र 459 चीनी मिलों का संचालन हुआ। महाराष्ट्र की 49, आन्ध्रप्रदेश की 06, तमिलनाडु की 08 एवं अन्य कई प्रदेशों की कई मिलों सहित देश की 70 चीनी मिलें इस वर्ष संचालित नहीं हुई, जबकि उत्तर प्रदेश में 2019-20 में सभी 119 चीनी मिलों का संचालन सुनिश्चित कराया गया।

6.अनपेड गन्ना मूल्य भुगतान

 कृषकों के वर्षो से लम्बित अनपेड गन्ना मूल्य का भुगतान किसानों को कराने के लिए अभियान अभियान चलाकर अब तक 92,215 गन्ना किसानों को लगभग रू.126ण्61 करोड़ की धनराशि का भुगतान कराया गया है।

7.गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित कराने हेतु ’’एस्क्रो एकाउंट’’

 प्रदेश में पहली बार विभागीय एवं चीनी मिल अधिकारियों के संयुक्त हस्ताक्षर से सभी चीनी मिलों के बैंक में ’’एस्क्रो एकाउंट’’खुलवाये गये ।
 चीनी मिलों द्वारा चीनी, शीरा, खोई एवं प्रेसमड बिक्री से प्राप्त धन का 85 प्रतिशत एस्क्रो एकाउंट में जमा किया जायेगा।
 एस्क्रो एकाउंट के कारण चीनी मिलों में गन्ना मूल्य मद की धनराशि के व्यावर्तन पर पूर्ण अंकुश लगेगा।
 भारत सरकार द्वारा अन्य गन्ना उत्पादक राज्यों को भी उ.प्र. की तर्ज पर एस्क्रो एकाउन्ट प्रणाली अपनाने के लिए एडवाइजरी जारी की गयी।

8ण्ऐतिहासिक गन्ना पेराई एवं चीनी उत्पादन

 विगत साढ़े तीन वर्षों में प्रदेश की चीनी मिलों द्वारा 3,262 लाख टन गन्ने की पेराई की गई है, जो विगत सरकार के 04 वर्षों की कुल गन्ना पेराई से 2,907 लाख टन से 355 लाख टन अधिक है।
 विगत साढ़े तीन वर्षों में गन्ना उत्पादकता में 8.72 टन प्रति हेक्टेअर की वृद्धि हुई। वर्ष 2016-17 की गन्ना उत्पादकता 72.38 टन प्रति हेक्टेअर से बढ़कर अब 81.10 टन प्रति हेक्टेअर हो चुकी है।
 प्रदेश में वर्ष 2017-18 एवं 2018-19 एवं 2019-20 में 365 लाख टन चीनी का रिकार्ड उत्पादन हुआ, जो इससे पूर्व के तीन वर्षों के कुल चीनी उत्पादन 211 लाख टन से भी 154 लाख टन अधिक है।
 वर्तमान सरकार के कार्यकाल मे गन्ना क्षेत्रफल में 6.86 लाख हेक्टेअर की वृद्धि हुई। गन्ना क्षेत्रफल वर्ष 2016-17 के 20.54 लाख हेक्टेअर से बढ़कर अब 27.40 लाख हेक्टेअर हो चुका है।

9. ई.आर.पी. के माध्यम से पर्ची निर्गमन कार्य
 चीनी मिलों की मनमानी एवं माफियाओं की समाप्ति के लिए गन्ना किसानों की गन्ना आपूर्ति में सुगमता एवं पारदर्शिता हेतु पर्ची निर्गमन व्यवस्था में व्यापक बदलाव कर सट्टा एवं पर्ची निर्गमन का कार्य गन्ना समितियों को हस्तांतरित।
 पेराई सत्र 2018-19 में वेण्डरों के माध्यम से पर्ची निर्गमन की विकेन्द्रीकृत व्यवस्था लागू की गई तथा इसके अनुभवों एवं जन-सामान्य के सुझावों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान पेराई सत्र 2019-20 हेतु पर्ची निर्गमन की व्यवस्था को एकीकृत, पारदर्शी एवं अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से ई.आर.पी. (इन्टरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) व्यवस्था लागू की गई।
 प्रदेश की 167 गन्ना समितियों एवं 14 चीनी मिल समितियों द्वारा पर्ची निर्गमन का कार्य ई.आर.पी. के माध्यम से संचालित।
 ई.आर.पी. (इन्टरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) व्यवस्था के अन्तर्गत चयनित वेण्डर द्वारा गन्ना आपूर्ति हेतु पूरे प्रदेश की गन्ना समितियों को एक साफ्टवेयर पर जोड़ते हुए गन्ना सर्वे, सट्टा निर्धारण, कलेण्डरिंग एवं पर्ची निर्गमन का कार्य एकीकृत रूप से मुख्यालय के पर्यवेक्षण में संचालित किया जा रहा है।
 इस व्यवस्था के अन्तर्गत वेब पोर्टल ूूूण्बंदमनचण्पद एवं मोबाइल एप ई-गन्ना ;म्.ळंददंद्ध पर गन्ना कृषकों के गन्ना सर्वे, सट्टा, कलेण्डरिंग, पर्ची निर्गमन आदि के आंकड़ें/जानकारियां उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से कोई भी कृषक किसी भी समय, किसी भी स्थान से, निःशुल्क सूचनाएं प्राप्त कर सकता है।
 एस.एम.एस. पर्ची सम्बन्धित कृषक के मोबाइल नम्बर पर भेजी जा रही है, जिससे कृषक बिना पेपर पर्ची के ही तौल करा रहा है।
 विगत साढे तीन वर्षों मे 10,56,991 नये गन्ना कृषकों को गन्ना समिति की सदस्यता दिलाई गई तथा 3,63,092 फजी, भूमिहीन, दोहरे सट्टे बंद किये गये।परिणामस्वरूप नये कृषकों को चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति का लाभ मिला।
 ई.आर.पी. व्यवस्था के अन्तर्गत तौल लिपिकों के आॅन लाइन कम्प्यूटरीकृत लाॅटरी सिस्टम से गन्ना क्रय केन्द्रों पर पाक्षिक स्थानांन्तरण एवं तैनाती की पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से घटतौली एवं गन्ना माफियाओं से सांठ-गांठ पर प्रभावी अंकुश लगा है।

10.आॅन लाईन खाण्डसारी लाईसेंसिंग व्यवस्था

 पेराई सत्र 2018-19 में नई ऑनलाइन खाण्डसारी लाइसेसिंग नीति जारी हुयी। इस व्यवस्था के तहत 100 घंटे में अनिवार्यतः लाइसेंस जारी करने की सुविधा प्रदान की गयी जिसके लिए वेब साईटीजजचरूध्ध्ूूू.नचाींदकेंतप.पद के माध्यम से आवेदन करना पडता है।
 नई खाण्डसारी इकाई के लाइसेंस हेतु चीनी मिल से न्यूनतम दूरी 15 कि.मी. से घटाकर 7.5 कि.मी. कर दी गयी है।
 विगत 25 वर्षों में प्रथम बार 243 नई खाण्डसारी इकाइयों हेतु लाइसेंस निर्गत हुए, जिनमें से 133 इकाईयां संचालित हो चुकी हैं।जिनकी कुल पेराई क्षमता 25,400 टी.सी.डी. है।
 संचालित 133 इकाईयों से ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 273 करोड़ का पूंजीगत निवेश होने के साथ ही लगभग 16,500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार की प्राप्ति हुई है।
 243 इकाईयों की स्थापना के बाद 59,950 टी.सी.डी. की अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन होगा जिससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 1179.20 करोड़ का पूंजीगत निवेश होगा और लगभग 50,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार की प्राप्ति होगी।
 इसके अतिरिक्त लगभग 4 से 5 लाख गन्ना कृषकों को गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा।

11. मिषन शक्ति अभियान के तहत ग्रामीण महिला उद्मियों को आत्मनिर्भर बनाना
 ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए बड चिप विधि से गन्ने की पौध तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद यह महिलायें पौध की बिक्री कर आय अर्जित कर सकेंगी।
 प्रदेश के 36 जिलों में 812 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है जिनमें 9,117 ग्रामीण क्षेत्र की महिला उद्यमी पंजीकृत हैं। जिनमें से 8,932 महिला उद्यमियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
 महिला समूहों द्वारा अब तक 3.51 करोड़ सीडलिंग की स्थापना की गयी है,जिनकी बिक्री से महिला समूहों को रू.10.53 करोड प्राप्त हांेगे।
 कृषकों को 3.11 करोड़ सीडलिंग का वितरण महिला समूहों द्वारा किया जा चुका है, जिसके माध्यम से महिला उद्मियों को रू.9.33 करोड की प्राप्ति हुई है।

12.गन्ना समितियों में ’’फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना’’
 गन्ना खेती मे लागत को कम करने के उद्देश्य से यंत्रीकरण को बढावा देने हेतु गन्ना समितियों मे फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना की जा रही है।
 वर्तमान में प्रदेश की 126 सहकारी गन्ना विकास समितियों एवं चीनी मिल समितियों में फसल अवशेषों के प्रबंधन हेतु ट्रैश मल्चर एवं मोल्डबोल्ड प्लाऊ सहित 378 फसल अवषेष प्रबंधन के कृषि यंत्रों की उपलब्धता में फार्म मषीनरी बैंक स्थापित एवं संचालित।
 गन्ने की सूखी पत्तियों को जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान से बचा जा सकेगा तथा मृदा की उर्वरता भी बढ़ेगी।
 भविष्य में फार्म मशीनरी बैंक योजना के अन्तर्गत गन्ना के खेती मे उपयोग मे आने वाले 12 प्रकार के 35 कृषि यंत्रों को सहकारी गन्ना समिति एवं चीनी मिल समितियों में उपलब्ध कराया जायेगा।
13.’’टोल फ्री गन्ना किसान काॅल सेन्टर’’की स्थापना
 गन्ना किसानों को 24 घंटे (24ग्7) शिकायत दर्ज करने की सुविधा हेतु टोल फ्री नम्बर 1800-121-3203 की हुई स्थापना।
 पर्ची निर्गमन हेतु भी कृषकों की शिकायत के त्वरित निवारण हेतु ई.आर.पी. टोल फ्री नंबर 1800-103-5823 भी प्रारम्भ किया गया है।
 साढे तीन वर्ष के दौरान पंजीकृत 88,534शिकायतोें के सापेक्ष शत-प्रतिषत षिकायतों का निस्तारण किया गया।
14.कोविड-19 के दौरान पेराई सत्र 2019-20 का सफल संचालन
 कोविड-19 के प्रभाव एवं लाॅकडाउन के कारण जहां अन्य प्रदेशों की अधिकांश चीनी मिलें बंद हो गई, उत्तर प्रदेश की सभी मिलें इस दौरान भी संचालित
होती रहीं तथा प्रदेश के गन्ना किसानों के हित में खेत में खड़े पेराई योग्य समस्त गन्ने की पेराई तक चीनी मिलों का संचालन सुनिश्चित कराया गया।
 कोरोना महामारी से बचाव हेतु सोशल डिस्टेंसिंग को सुनिश्चित कराने के लिए लाॅकडाउन घोषित होने के पश्चात् प्रिन्टेड पर्ची के स्थान पर शत-प्रतिशत एस.एम.एस. के माध्यम से गन्ना खरीद सुनिश्चित करायी गई।
 कोविड लाॅक डाउन के दौरान लगभग 1.5 लाख लोगों को स्थायी/अस्थायी प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध हुए। इसके अतिरिक्त लगभग 08 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित हुआ।
 लाॅक डाउन के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 10 लाख दैनिक मजदूरों को गन्ना छिलाई/कटाई एवं गन्ना खेती से जुड़े कृषि कार्यों के माध्यम से प्रतिदिन रोजगार प्राप्त हुआ।
15. उ.प्र. के सेनिटाइजर का देष भर में निर्यात
 प्रदेश की चीनी मिलों एवं अन्य को मिलाकर कुल97 कम्पनियों द्वारा अब तक 1,80,17,657 लीटर सैनिटाईजर का कुल उत्पादन किया गया है, जिससे देश के विभिन्न राज्यों की सैनिटाइजर आवश्यकता की पूर्ति की जा रही है।
 प्रदेश की चीनी मिलों की प्रतिदिन सैनिटाईजर उत्पादन की क्षमता लगभग 6.3 लाख ली. से अधिक है।
16. गन्ना कृषकों को लाभ

 औसत गन्ना उत्पादकता 72.38 से 81.10 मी. टन प्रति हेक्टेयर बढ़ जाने से प्रति हेक्टेयर 8.72 मी. टन अतिरिक्त गन्ने का उत्पादन।
 उत्पादकता बढ़ने से किसानों की आय में औसत रू.320 प्रति कुन्तल गन्ने की दर से रू.27,904 प्रति हेक्टेयर के बढ़े उत्पादन के फलस्वरुपवृद्धि।
 दो पेराई सत्रों में चीनी परता में 0.85 की वृद्धि हुई तथा औसत चीनी परता में वृद्धि से 8.92 लाख टन अतिरिक्त चीनी का उत्पादन हुआ।

17.गन्ना आपूर्ति में सुविधा हेतु सट्टा नीति में परिवर्तन
 गन्ना सट्टे की सीमा 100 कुन्टल प्रति हेक्टेयर बढ़ाकर, प्रति कृषक, सीमान्त कृषकों (01 हेक्टेयर तक) के लिए अधिकतम 850 कु. लघु कृषकों(02 हेक्टेयर तक) हेतु 1,700 कु. तथा सामान्य कृषकों (05 हेक्टेयर तक)हेतु 4,250 कु. तथा उपज बढ़ोत्तरी की दशा में सट्टे की अधिकतम सीमा क्रमशः 1350 कु., 2,700 कु. तथा 6,750 कु. प्रति कृषक की गयी।
 सट्टा नीति में सैनिकों के साथ-साथ अर्ध सैनिक बलों- सी.आर.पी.एफ., बी.एस.एफ., एस.एस.बी., सी.आई.एस.एफ., आई.टी.बी.पी. एवं असम राइफल्स को भी गन्ना आपूर्ति में 1 जनवरी से 20 प्रतिषत की प्राथमिकता।

18.नाबार्ड ऋण अदायगी पर वर्ष में 02 बार डिमांड लगाकर
ब्याज अनुदान का पूर्ण लाभ
 पूर्व वर्षों में गन्ना समिति द्वारा मात्र 01 बार कर्ज की डिमांड लगाने के कारण कृषकों को 07 प्रतिशत ब्याज देना पड़ता था।
 अब वर्ष में 01 अक्टूबर से 31 मार्च तक बाटे गये ऋण की डिमांड 01 अप्रैल को एवं 01 अप्रैल से 30 सितम्बर तक बांटे गये फसली ऋण की डिमांड गन्ना समितियों द्वारा 01 अक्टूबर को लगाई जायेगी।
 इससे कृषकों को समय पर ऋण अदायगी पर 04 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ प्राप्त होगा।
19.‘‘प्लास्टिक वेस्ट” से गुणवत्तापूर्ण सड़कों का निर्माण
 वित्तीय वर्ष 2019-20 में जिला योजनान्तर्गत कुल 50.00 किमी. सड़कों पर अनुपयोगी प्लास्टिक अवशेष का प्रयोग।
 प्रति कि.मी. सड़क के निर्माण में लगभग 438 कि.ग्रा. अनुपयोगी प्लास्टिक के उपयोग से लगभग 438 किग्रा बिटुमिन की बचत हुई तथा अनुपयोगी प्लास्टिक के प्रयोग से प्लास्टिक कूड़े का निस्तारण एवं पर्यावरण संरक्षण में मदद मिली।
20.गन्ना किसानों की संस्था, सहकारी गन्ना समितियों का सुदृढ़ीकरण
 प्रदेश की सभी 167 गन्ना समितियों ने आयकर विभाग से टी.डी.एस. रिफण्ड प्राप्त करने हेतु विशेष अभियान चलाया गया। आयकर विभाग द्वारा टी.डी.एस के रूप में कटौती की गयी धनराशि से रू.184.11 करोड़ का रिफण्ड गन्ना समितियों को हुआ। टी.डी.एस. रिफण्ड में हुई उल्लेखनीय प्रगति से गन्ना समितियों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई ।
 गन्ना समितियों की सम्पत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने एवं उन्हें सुरक्षित करने हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत गन्ना समितियों की सभी 968 सम्पत्तियो को चिन्हित कर उनकी जियो-मैपिंग करायी गयी।
 968 सम्पत्तियों में से 65 अतिक्रमित सम्पत्तियाँ भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज हुयी, जिनमें से लगभग रू.16.00 करोड़ की 33 सम्पत्तियाँ कब्जामुक्त करायी गयी ।
 गन्ना समितियों की आय में वृद्धि हेतु दुकान आवंटन एवं किराया निर्धारण नीति लागू करते हुए जिलाधिकारी किराया सर्किल रेट के अनुसार गन्ना समितियों की दुकानों से मिलने वाले प्रतिमाह किराये को पुर्ननिर्धारित किया गया, जिसके तहत 40 गन्ना समितियों की कुल 678 दुकानों के किराये मे लगभग 3.07 गुने की बढ़ोत्तरी हुई है।
21. गन्ने की अस्वीकृति प्रजाति का क्षेत्रफल

 विगत साढ़े तीन वर्षों में उन्नतषील प्रजाति व निरोगी 248.55 लाख कु. गन्ना बीज से अस्वीकृत प्रजाति के गन्ने का विस्थापन हुआ है। इस विस्थापन एवं विभाग द्वारा किये जा रहे प्रयासो से अस्वीकृत प्रजाति के गन्ने का क्षेत्रफल 5.14 से घटकर 0.51 प्रतिषत हो गया है।

22.ड्रिप इरीगेशन संयंत्रों की स्थापना
 विगत साढ़े तीन वर्षों में 17,615 हेक्टेयर गन्ना खेती में विभाग द्वारा ड्रिप इरीगेशन संयंत्र की स्थापना करायी गयी। इससे 50 प्रतिषत् तक सिंचाई जल की बचत होगी तथा क्षारयुक्त और अल्प वर्षा वाले क्षेत्रांे में भी गन्ना खेती सम्भव हो सकेगी।
 सिंचाई जल के साथ पोषक तत्वों के प्रयोग (फर्टिंगेशन) से 50 प्रतिशत रासायनिक उर्वरकों की बचत होगी तथा फसल मे खरपतवारों का नियंत्रण आसान होगा।
23.उन्नतषील पेड़ी प्रबन्धन से पेड़ी की उत्पादकता मे वृद्धि
 विगत साढ़े तीन वर्षों में 7.24 लाख हेक्टेयर में उन्नतषील पेड़ी प्रबन्धन किया गया है जिससे पेड़ी की उत्पादकता में 5 से 10 प्रतिशत तथा चीनी परता मे 2 से 5 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
24.गन्ना विभाग द्वारा पेड़ी प्रबन्धन में टैªश मल्चिंग को बढ़ावा
 चीनी मिल क्षेत्र मे ट्रैश मल्चर की व्यवस्था चीनी मिल एवं विभाग के सहयोग से सुनिश्चित की जा रही है। ट्रेष मल्चिंग हेतु कृषकों को अधिकाधिक जागरूक किया जा रहा है जिससे ट्रैंश मल्ंिचग एवं रैटून मैनेजमेन्ट डिवाईस (आर.एम.डी.) के प्रयोग को बढ़ावा मिले।
 गोष्ठी/कृषक मेला, पम्पलेट, दैनिक समाचार पत्रों, वाल पेन्टिंग, दूरदर्शन आदि के माध्यम से प्रचार-प्रसार करते हुए अधिक से अधिक कृषकों को गन्ने की सूखी पत्तियों को न जलाने की जानकारी विभाग द्वारा प्रदान की जा रही है।
 उपरोक्त के फलस्वरूप गन्ने की सूखी पत्तियों के स्थान पर गन्ना कृषकों द्वारा साढे तीन वर्षो 2017-18, 2018-19, 2019-20 एवं 2020-21 मे कुल 22.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल मे ट्रैश मल्चिंग की गयी।
25.सहफसली खेती के माध्यम से फसल विविधीकरण
 गन्ना विभाग द्वारा विगत साढ़े तीन वर्षों में 15.59 लाख हेक्टेयर में गन्ने के साथ सहफसली खेती करायी गयी है। खेती की इस विधि के माध्यम सेकृषकों एक अतिरिक्त फसल की प्राप्ति हो रही है, इससे कृषकों की आय में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है तथा उत्पादन लागत में 5 से 10 प्रतिशत तक की कमी आयी है।
26.गन्ना बुवाई की विधि (ट्रेंच विधि) को बढ़ावा
 गन्ना विभाग द्वारा विगत साढ़े तीन वर्षों में 17.28 लाख हेक्टेयर में ट्रेंच विधि से गन्ना बुवाई सम्पन्न करायी गयी है। बुवाई की इस विधि से गन्ने की खेती में पानी एवं उर्वरकों के उपयोग में कमी आयी है, तथा गन्ने की उपज में 10 से 15 प्रतिशत तथा कृषकों की आय में 5 से 10 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
27.उत्कृष्ट कार्य करने वाले गन्ना किसानों, गन्ना समितियों एवं चीनी मिलों को पुरस्कृत करने हेतु पुरस्कार योजना प्रारम्भ
 गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले किसानों व गन्ना समितियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में क्रमशः रू.51,000, रू.31,000 व रू.21,000 की धनराशि तथा स्मृति चिह्न व प्रमाण-पत्र से किया जायेगा पुरस्कृत।
 गन्ना किसानों, गन्ना समितियों और चीनी मिलों की आपसी प्रतिस्पद्र्धा में वृद्धि से उनकी कार्यकुशलता में बढ़ोत्तरी होगी ।
28.राज्य स्तरीय गन्ना उत्पादकता प्रतियोगिता पुरस्कारों मे नई श्रेणियाॅ एंव पुरस्कार धनराशि मे बढोत्तरी
 गन्ने की उपज को प्रति हेक्टयर अधिकाधिक बढाने तथा गन्ना किसानों के मध्य स्वस्थ प्रतिस्र्पधा कायम करने एवं स्वरोजगार तथा मिट्टी से जुडाव की भावना के दृष्टिगत वर्ष 2020-21 मे प्रतियोगिता नियमावली मे संषोधन कर 02 नई श्रेणी ड्रिप विधि से सिचाई एवं युवा गन्ना किसान को उत्पादकता पुरस्कारों मे सम्मिलित किया गया।
 राज्य गन्ना प्रतियोगिताओं मे अब प्रथम, द्वितीय एंव तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले गन्ना कृषकों को मिलने वाली पुरस्कार धनराषि क्रमषः रू.10,000, 7,000, एवं 5,000 मे लगभग डेढ गुना बढोत्तरी करते हुए रू.15,000, 10,000 एवं 7,500 किया गया।
29.गन्ना किसानों को ’’एम-किसान पोर्टल’’ से सम्बद्ध/जोड़ा जाना
 प्रदेश के 43.20 लाख गन्ना किसानों को ’’एम-किसान पोर्टल’’ से सम्बद्ध किया गया।
 गन्ना खेतीध्विपणन से जुड़ी नवीनतम् विधायेंध्सूचनायें कृषकों के मोबाइल फोन पर उपलब्ध ।
 नवीनतम् जानकारी से ही गन्ना किसानों ने गन्ना बुवाई विधि में किया बदलाव, अपनाया “ट्रैंच विधि”।
 आधुनिक जानकारीध्विधियों के उपयोग से घट रही है खेती की लागत एवं बढ़ रही है किसान की आमदनी।