जीवन युद्ध 
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स्वयं के सत्य को मुझे है पाना,  अज्ञान का अंधकार हट पूर्वक है मिटाना , क्यों रहूं जीवन में अधूरी , अविकल्प संकल्प ये क्यों ना हो पूरा , मिटा दूं असत्य को , खोज लूं दृढ़ सत्य को,  केवल चलती रहूं , निशिवासर लड़ती रहूं,  हर अंधकार से , तमस और विकार से , मुझ पर दया मत करो , बस,  मेरा संकल्प मत हरो,  जय विजय की ना हो मुझे चिंता,  बस , पराजय ना दे पाए भय और मलिंता, ना तो मैं थकूं ,ना मन से टू टूं, ना हारू, तन टूटे टूट जाए , श्वास रूठे रुठ जाए,  पर तमस पर प्रहार मेरा , ना रुकने पाए , हर पराजय में खोज सकूं आगे बढ़ने की राह , सत्य को हर क्षण समझने की चाह,  ना हो व्यर्थ मेरी यात्रा , न घटने पाए संकल्प की मात्रा , कर अतिक्रमण जय पराजय का , तुम्हारे प्रकाश में चलती रहूं , बढ़ती रहूं , न देखूं पलट कर पीछे,  जो होना था हो गया , ना सोचूं आने वाली राह , जो होना है होकर रहेगा , बस आगे बढ़ते रहूं, जीवन के अंत तक , असत्य से लड़ती रहूं , जीवन धारा में बहती रहूं!

✒️ डॉ स्वाति मिश्रा
देहरादून

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