"हस्पताल"
"हस्पताल"

मेरा गाँव 

शहर की नब्ज़ की तरह

दिन रात चुपचाप

लगा रहता है

उगाने में, बनाने में

संवारने में शहर की काया

पर जब इसी गाँव के बाशिंदे

होते हैं बेहाल

बीमार परेशान

शहर के हस्पताल

चूस लेते हैं

इनकी सारी मेहनत

खून ,पसीना

कुछ दवाइयों के एवज़ में

सिम्मी हशन (बलिया)

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