सड़क किनारे वो गालो को छूता, लटो को हटाता
सड़क किनारे वो गालो को छूता, लटो को हटाता

वो गालों को छूता


लटों को हटाता


कभी चूम लेता


पेशानी वो उसकी


सुना था कोई 


लाश थी बरहना सी


सड़क के किनारे 


मिली झाड़ियों में


था वालिद वो भी 


अपनी नन्ही कली का


सहमा था सुन के


 खबर रो पड़ा था


कभी चूमता हाथ


 मासूम के वो


वो इस हादसे से


टूटा हुआ था


कहता वो कैसे 


उस नन्ही कली से


दिल से लगाए 


यही सोचता था


जनाज़ा वो कितना


भारी सा होगा


जो किसी बाप के 


कांधे से उठेगा


नन्ही सी कलियाँ


ये नन्ही सी परियाँ


सलामत रहें कैसे 


ये सोचता था


सहमा हुआ बाप


मुस्का रहा था


वो बेटी को कांधे पे


 बहला रहा था


कभी चूमता हाथ


 लट को हटाता


बज़ाहिर में जैसे


 वो साकित सा था पर


अंदर ही अंदर


 घुटा जा रहा था


वो अंदर ही अंदर


 घुटा जा रहा था


घुटा जा रहा था.. 


घुटा जा रहा था...

SIMMY
 

सिम्मी हसन,बेल्थरा रोड़, बलिया यूपी से

Share this story