पल का पता नहीं....
पल का पता नहीं....

 उम्मीदों पर 

उम्मीदें हैं-

पल का पता नहीं.

कल का पता नहीं...

सफ़र रेत का, 

सहरा वाला.

पहले कभी, 

 न देखा-भाला.

दूर दूर तक,

धूप है केवल.

जल का पता नहीं.

कल का पता नहीं...

नींद खुली न,

 हुआ सवेरा.

चला गया वो,

जग से चेहरा.

उसके आगे, 

किसकी चलती,

हल का पता नहीं.

कल का पता नहीं...   

 ✍️तुलसी राज पांडे

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