उत्साह के साथ मना स्वामी ओमा द अक्क का जन्मदिन, मुस्लिम समुदाय ने किया रक्तदान
उत्साह के साथ मना स्वामी ओमा द अक्क का जन्मदिन, मुस्लिम समुदाय ने किया रक्तदान

वाराणसी(अम्बरीष राय) नफ़रतों के इस दौर में एक घर मुहब्बत का है. जहां सियासत की कोई बात नहीं, कोई एजेंडा नहीं. कुछ लोग इस दौर में भी बचे हैं जो हिस्सों में नहीं बंटे हैं. लेकिन हिस्सेदार हैं इस मुल्क़ के, इस गंगो जमन के, इस हिन्दुस्तान के. महादेव की नगरी काशी दरअसल विद्रोह का प्रतीक है. हो भी क्यों ना, जब महादेव विद्रोह के प्रेमी हैं. आशिक़ हैं. और बस कृपालु हैं. एक आंदोलन उसी काशी की धरती पर उपजा है. जहाँ  सबके लिए प्यार है. जहाँ सबके हिस्से में मुहब्बत रहनी है. एक शख़्स जो मुहब्बतों से भरा है. जो बोलता है तो भगवत्ता तुम्हारे आस पास से गुज़रती है. आध्यात्म मूर्ति स्वामी Oma the akk एक सामान्य मानवीय के लिए एक थोड़ा अजीबोगरीब संबोधन हो सकता है, लेकिन मानवता के लिए वरदान ही है. स्वामी Oma वाराणसी के कैंटोनमेंट के बुद्ध विहार क्षेत्र से एक आध्यात्मिक आंदोलन Akk को सींच रहे हैं. इस आध्यात्मिक आंदोलन का सकारात्मक असर आज दुनिया के कई हिस्सों में है. 

उत्साह के साथ मना स्वामी ओमा द अक्क का जन्मदिन, मुस्लिम समुदाय ने किया रक्तदान

पिछले दिनों उनका अवतरण दिवस था. तारीख़ थी 21 अगस्त. वो चले गए अपने आत्म साक्षात्कार में. अपने एकांत में. अपनों से दूर अपने आप के साथ. ना कोई मार्केटिंग ना कोई प्रचार की भूख. आध्यात्मिक आंदोलन Akk और 'हम भारत हैं' अभियान के सदस्यों ने वाराणसी में उनका अवतरण दिवस मनाया. एक हिन्दू संत के जन्मदिन पर  मुस्लिम समुदाय के लोगों का तांता था. ये मेरे लिए एक हैरतअंगेज वाकया था. आज जब पूरा भारत धार्मिक वैमनस्यता, असहिष्णुता और धार्मिक पूर्वाग्रहों की चपेट में है तो इस दौर के कबीर के साथ हिन्दू मुसलमान सब खड़े थे. ये और बात है कि उनको(oma the akk) कबीर कहलाना पसंद नहीं है. बुद्ध से तुलना भी अरुचिकर है. हिन्दुत्व की तय पाई गई पीठों और उपाधियों  से भी उनका वास्ता नहीं है. दरअसल वो सूक्ष्म और स्थूल का मध्य हैं. ख़ैर एक वैदिक ब्राह्मण पुरोधा, हिन्दू नामधारी, सनातनी के घर में मुस्लिम बंधुओं का जमावड़ा था. साकिब भारत एक अनोखा इंसान, एक सच्ची भारतीय आत्मा अपने गुरु, अपने फिलॉस्फर, गाइड के अवतरण को अनोखा बनाने के लिए उतावला था. अलसुबह निर्धन, बेसहारों को भोजन देता वो निस्पृह था. फिर 'रक्तदान महादान' की विश्वव्यापी अवधारणा के साथ पूरे दिन लोगों से लोगों के लिए खून की व्यवस्था करता रहा.  देर शाम वो कुष्ठ रोगियों के बीच था. कुछ मेहमानों के लिए भी उसको वक़्त निकालना था, उसने निकाला भी. ख़ैर वो आपके लिए कोई महत्वपूर्ण बात नहीं होगी, लेकिन दरअसल है. एक तस्वीर मेरे ज़ेहन से निकलती नहीं. एक ब्राह्मण पुरोहित और एक मौलाना साथ में जन्मोत्सव में सक्रिय थे, जब उनकी फोटो ली गई. 

उत्साह के साथ मना स्वामी ओमा द अक्क का जन्मदिन, मुस्लिम समुदाय ने किया रक्तदान

ये तस्वीर उस भारत का प्रतिनिधित्व करती है, जहाँ सभी धर्मों को सहूलियत और सम्मान प्राप्त होता रहा है. लेकिन आज इस तस्वीर के रंग थोड़े मुश्किल में हैं. कुछ लोग इस तस्वीर से खुशियों के रंग खींच लेना चाहते हैं. इस तस्वीर को फाड़ देना चाहते हैं. इस तस्वीर को जला देना चाहते हैं. लेकिन akk इस तस्वीर की खूबसूरती को समझता है और इसके रंगों को पक्का कर रहा है. ताकि कोई भी बदहवासी इस तस्वीर को चोट ना पहुंचा सके. ज़रा सोचिए कि एक ऐसे दौर में जब दो धर्मो के बीच पड़ी दरार को मौजूदा निज़ाम खाई में तब्दील करने में क़ामयाब हो गया हो, तो कुछ उम्मीद के दीये टिमटिमा रहे हैं. एक ऐसे दौर में जब फोटोशूट और फोटोसेशन ही परसेप्शन को गाढ़ा करते हों, उसी समय कुछ लोग बस चुपचाप खून दे रहे थे. एक हिन्दू संत के लिए, उसके आश्रम में जाकर. मुस्लिम आतंकियों के समर्थक माने जाने वाले,  ये बस मुस्लिम परस्त होने के सर्टिफिकेट से जूझने वाले दाढ़ियां बस कमाल कर रही थीं, चुपचाप हम देखे जा रहे थे. काश कि ये तस्वीरें हिंदुस्तान के घर घर तक पहुंचे. लोग जानें की ख़बरों की बनावट और बुनावट से परे कुछ लोग बस परमात्मा का काम कर रहे हैं. 

रक्तदान कार्यक्रम में मनोयोग से लगे रहे एक शख़्स को मैंने देखा. हितेश अक्क एक सम्राट सा व्यक्तित्व, एक  मनुष्यता से भरा देवत्व बस चुपचाप अपने समर्पण की यात्रा में है. ना कुछ पाने की चाहत और ना कुछ खोने का डर. बस एक व्यवहार जो oma the akk महाराज ने कहा, वही सत्य है और सब मिथ्या है. अपने जानने में कुछ अच्छे लोगों के बारे में सोचूं तो हितेश उनसे मीलों दूर निकल जाते हैं. अपने आराध्य Oma the akk महाराज के अवतरण दिवस पर ख़ामोशी से अपने हिस्से का सच जी रहे थे. लगातार ऊर्जावान थे, और कार्यशील भी. 

बहरहाल प्रायोजित एजेंडे से दूर काशी में एक ऐसा आंदोलन आकार ले रहा है, जहाँ इंसान की बात होती है. गीता की बात होती है. कुरआन की बात होती है. महावीर की बात होती है, बुद्ध की बात होती है, नानक की बात होती है. क्राइस्ट की बात होती है. हर ईश्वरीय व्यक्तित्व की बात होती है. इंसानियत की बात होती है. सच की बात होती है. और इस Akk आंदोलन से निकलने वाला संदेश मानवता का संदेश है. भारत का संदेश है.

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