पाकिस्तान की जेल से रिहा हुआ बांदा का रामबहादुर, 12 साल पहले काम की तलाश में घर से निकला था, खुशी से रो पड़े मां-बाप
पाकिस्तान की जेल से रिहा हुआ बांदा का रामबहादुर, 12 साल पहले काम की तलाश में घर से निकला था, खुशी से रो पड़े मां-बाप

बांदा। पाकिस्तान की जेल से रिहाई के बाद अमृतसर पहुंचने वाला रामबहादुर नरैनी तहसील क्षेत्र के पचोखर गांव का रहने वाला है। वह 12 साल पहले गुम हो गया था। स्वजन मध्य प्रदेश तक तलाश करने के बाद निराश हो गए। अचानक अमृतसर प्रशासन का फोन पहुंचा तो सभी भौचक रह गए। बूढ़ी मां कुसमा की आंख से आंसू झरने की तरह बहने लगा। पिता गिल्ला बस केवल ऊपर की ओर नजरें ताक मानों भगवान का धन्यवाद दे रहे हों। हालांकि मई माह में यह तो पता चल गया था कि वह पाकिस्तान की जेल में बंद है, पर कब छूटेगा यह पता नहीं था। अब उसे लेने जाने के लिए छोटा भाई परिचितों से उधार मांग जाने के किराए की व्यवस्था में लगा है ।

पचोखर गांव निवासी गिल्ला प्रजापति का बेटा आज करीब 45 वर्ष का हो गया है। गिल्ला ने बताया कि अब से 12 साल पहले वह गांव के लड़कों के साथ केवल बनियान पहनकर साइकिल से नरैनी गया था, उसके बाद से कुछ पता नहीं चला। फरवरी 2009 से हर जगह तलाश की। कई साल बीते तो बेटे के सकुशल लौटने को लेकर सभी लोग निराश हो चुके थे। 

पहुंची थी एलआइयू टीम, की थी जांच : पूर्व प्रधान लवकुश त्रिपाठी ने बताया कि इसी वर्ष मई माह में एलआइयू की टीम गांव आई थी। पाकिस्तान के प्रमुख सचिव का पत्र दिखाया था। बताया था कि रामबहादुर पाकिस्तान की जेल में बंद है। वहां से उसके चाल-चलन की जानकारी मांगी गई थी। जिसके बाबत टीम ने स्वजन के अलावा ग्रामीणों से पूछताछ की थी। तहसीलदार सुशील सिंह से जानकारी ली। घर वालों के बयान लिए गए और एफीडेविट लिया गया था। पिता व छोटे भाई मैकू ने अपने बयान में पूरी बात बताई थी। 

तीन साल रहा लाहौर की जेल में : पूर्व प्रधान लवकुश के मुताबिक दिखाए गए पत्र से पता चला था कि उसे पाकिस्तान में सात साल की सजा हुई थी, इस दौरान वह तीन साल लाहौर की जेल में भी रहा था। 

तीन माह बाद चली गई  पत्नी, बिगड़ गई मानसिक हालत : पिता गिल्ला ने  बताया कि बेटा पहले बिल्कुल ठीक था। वह लोग भूमिहीन हैं। बटाई पर खेती-किसानी कर परिवार का भरणपोषण करते हैं। रामबहादुर भी खेती किसानी करता था। उसकी मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के तीरतपुराव निवासी गेंदा से शादी की थी। बहू तीन माह बाद ही छोड़कर चली गई। उसके बाद बेटे का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। 

कांस्टेबल के साथ स्वजन को बुलाया है अमृतसर प्रशासन ने  बेटे की रिहाई और जल्द घर आने की बात सुन मां कुसमा केवल आंसू बहाती रहीं, यह खुशी के आंसू सबकी आंख नम कर रहे थे। मैकू ने बताया कि अमृतसर से आए फोन पर कहा गया था कि किसी कांस्टेबल को लेकर आ जाएं और रामबहादुर को ले जाएं। साथ में जिला प्रशासन का पत्र भी ले जाना है।

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