उत्तराखंड में वाहन दुर्घटनाओं में सौंपी जाने वाली मजिस्ट्रेटी जांच सुस्त रफ्तार से बढ़ रही आगे
उत्तराखंड में वाहन दुर्घटनाओं में सौंपी जाने वाली मजिस्ट्रेटी जांच सुस्त रफ्तार से बढ़ रही आगे

देहरादून। प्रदेश में वाहन दुर्घटनाओं में सौंपी जाने वाली मजिस्ट्रेटी जांच सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। आलम यह है कि अभी तक कराई गई 109 मजिस्ट्रेटी जांच में से केवल 38 की जांच ही पूर्ण हो पाई हैं। यह आंकड़ा कुल जांच का लगभग 35 फीसद है। 65 फीसद जांच अभी लंबित हैं। ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, देहरादून, हरिद्वार और रुद्रप्रयाग जिलों में एक भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। वहीं चंपावत व पिथौरागढ़ जिले में कोई भी जांच लंबित नहीं है। इसे देखते हुए परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने लंबित जांच को जल्द से जल्द पूरा करने और भविष्य में दुर्घटना घटित होने की सूरत में होने वाली मजिस्ट्रेटी जांच एक माह के भीतर करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जांच के लंबित मामलों की सूची गढ़वाल व कुमाऊं मंडल को भी भेजने को कहा है।

प्रदेश में हर साल वाहन दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। सार्वजनिक वाहनों से होने वाली बड़ी दुर्घटनाओं के मामले में सरकार मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश देती है। प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में सार्वजनिक वाहनों से हुई दुर्घटनाओं के 109 मामलों में मजिस्ट्रेटी जांच सौंपी गई। इन जांच को लेकर जांच अधिकारी गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। विशेष तौर पर मैदानी क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाओं के मामले में। आंकड़ों पर नजर डालें तो पर्वतीय जिलों में जांच पूरी करने की रफ्तार मैदानी जिलों से कहीं अधिक है।

ऊधमसिंह नगर में सार्वजनिक वाहन दुर्घटनाओं के 16 मामलों की मजिस्ट्रेटी जांच सौंपी गई थी। इनमें से एक भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। यही हाल नैनीताल का है। यहां भी 16 जांच सौंपी गई और ये सभी लंबित चल रही हैं। पौड़ी में पांच जांच में से एक जांच पूर्ण हुई है। देहरादून में 10 जांच में से एक भी पूरी नहीं हो हुई है। ऐसा ही हरिद्वार जिले में भी है। यहां 11 मामलों में मजिस्ट्रेटी जांच सौंपी गई और सभी लंबित चल रही हैं। टिहरी की पांच जांच में से केवल दो ही पूरी हो पाई हैं। उत्तरकाशी जरूर इस मामले में सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। यहां 14 में से 11 जांच पूर्ण हो चुकी हैं। रुद्रप्रयाग में तीन में से एक भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। अल्मोड़ा में भी जांच तेजी से हो रही हैं, यहां 16 में से 13 जांच पूरी हो चुकी हैं। चमोली में दो में से एक जांच पूर्ण हो चुकी है। वहीं बागेश्वर में भी चार में से तीन जांच पूरी हो चुकी हैं।

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