अपनी सादगी और सरलता के लिए विख्यात आदरणीय भगत सिंह कोश्यारी जी 
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अपनी सादगी और सरलता के लिए विख्यात आदरणीय भगत सिंह कोश्यारी जी वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
भगत सिंह कोश्यारी जी का जन्म देवभूमि उत्तराखंड के  अल्मोड़ा जिले में हुआ उनके पिता श्री गोपाल सिंह जी  पेशे से किसान और माताजी मोतीमा देवी एक घरेलू महिला थी । कोश्यारी जी 11 भाई बहनों में नवी संतान हैं उनकी पारिवारिक आजीविका का मुख्य साधन खेती पाति ही था इसलिए उन्होंने अपनी  प्रारंभिक और उच्च शिक्षा काफी कठिनाइयों के साथ प्रदेश से ही प्राप्त की । उन्होंने बताया कि उनका जीवन हमेशा से ही काफी साधारण रहा है । अतः कहा जा सकता है कि वह सालीनता और सहिष्णुता के धनी व्यक्ति हैं। भगत सिंह कोश्यारी जी ने अपनी कर्मभूमि शोर घाटी यानी छोटा कश्मीर पिथौरागढ़ को बनाया जो अपने प्राकृतिक संपदा और सौंदर्य हेतु खासा चर्चा में रहता है।  आज महामहिम जी अपनी इसी  जीवन शैली के लिए ही राजनीति में छाये  हुए हैं। उनसे मेरी मुलाकात सर्वप्रथम जब मैं मात्र 11 साल की थी तब हुई जब वह एक उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पधारे हुए थे । उसमें एक छात्रा के रूप में उनका स्वागत करने के लिए मैं भी  विशेष रूप से विद्यालय परिवार की तरफ से उपस्थित थी । भगत सिंह कोश्यारी जी का स्वागत करते हुए मैंने उनका तिलक भी किया हाइट छोटी होने के कारण वहां पर पहले से ही  स्टूल रखा गया था ताकि अंगुली आसानी से माथे तक पहुंच सके और आगे हमने एक स्वागत गीत व नृत्य प्रस्तुति भी दी थी जिसमें जहां तक याद है कि मेरी साड़ी आधी खुल चुकी थी फिर भी मैं एक हाथ से साड़ी सम्भालती  रही और दूसरे हाथ से नृत्य के हाव भाव …
और भगत दा ताली बजाते हुए सामने से हमारा मनोबल बढ़ाने हेतु कह रहे थे बहुत अच्छा …! बहुत अच्छा ..!  मैं अपने डांस  करने में इतनी व्यस्त थी कि मैं अपनी साड़ी को संभालना ज्यादा उचित न समझ कर अगले हाथ से नाचने को ज्यादा तवज्जो देना उचित समझने की भूल कर रही थी ।  मैंने उनसे  इस बात को साझा किया। 
जब आज  मैंने अपनी लिखी हुई पुस्तक "मां का समर्पण" (ड्रीमलैंड ऑफ फूलमती ) उन्हें भेंट किया तो आदरणीय भगत सिंह कोश्यारी जी काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने प्रसन्नता जताते हुए मुझे काफी आशीर्वाद दिया और पुस्तक का सारांश आदि पढ़कर सराहते रहे यहां तक कि कुछ अन्य व्यक्तियों को बाहर ही रोक दिया और बड़ी तसल्ली से बातचीत करने लगे अन्ततः आशीर्वाद प्रदान किया उनसे मिलकर  बहुत अच्छा लगा ।
एक बहुत ही साधारण वेशभूषा में रहना और सालीन आचरण के साथ ही सादा जीवन उच्च विचार की लोकोक्ति को चरितार्थ करना वाकई मैंने उनमें पाया ।
धन्यवाद 🙏🏻

✒️समभावना पन्त

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