रेमडेसिविर और जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी की शिकायत पर औषधि नियंत्रण विभाग ने शहरभर में की छापेमारी

रेमडेसिविर और जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी की शिकायत पर औषधि नियंत्रण विभाग ने शहरभर में की छापेमारी

देहरादून

रेमडेसिविर और जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी की शिकायत पर आज औषधि नियंत्रण विभाग ने शहरभर में छापेमारी अभियान चलाया। शहर के जिन भी इलाकों से कालाबाजारी की शिकायतें सामने आई थी। टीम ने उन इलाकों के प्रत्येक कैमिस्ट/मेडिकल स्टोर में जाकर दवाओं की जांच के साथ ही रिकार्ड चैक किया। छापेमारी अभियान में टीम को अस्पतालों और मेडिकल स्टोर से जुडे़ रेमडेसिविर की कालाबाजारी के तार के कोई ठोस प्रमाण अभी नहीं मिला है पर प्रथम दृष्टया ऐसी ही कुछ सामने आया है।

रेमडेसिविर और जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी की शिकायत पर औषधि नियंत्रण विभाग ने शहरभर में की छापेमारी

कुछ शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इंजेक्शन दवा की दुकान से नहीं बल्कि किसी व्यक्ति से लिए हैं कहा जा रहा है कि अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदार जैसे तैसे रेमडेसिविर इंजेक्शन अस्पताल को लाकर देते हैं पर आइसीयू में भर्ती मरीज को इंजेक्शन लगा या नहीं इसका कुछ अता पता नहीं। न इसका कोई रिकार्ड रहता है। इन्हीं इंजेक्शन को बाहर महंगे दाम पर बेचे जाने की बात सामने आ रही है।

ऐसे में अब जिन भी अस्पतालों को रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, उन्हें इनके इस्तेमाल का पूरा ब्यौरा औषधि नियंत्रण विभाग को देना होगा। मरीज के आधार कार्ड, प्रिसकिप्शन व कोविड रिपोर्ट की छायाप्रति उन्हें विभाग को देनी है। साथ ही इंजेक्शन की खाली वायल भी प्रमाण के रूप में रखनी होगी। औषधि नियंत्रक ने बताया कि अस्पतालों को जरूरत अनुसार इंजेक्शन दिये जा रहे हैं।

भारत सरकार से प्रदेश को 13575 रेमडेसिवीर इंजेक्शन मिल रहे हैं पर यह आवश्यक है कि अस्पताल इनका जायज इस्तेमाल करें। इनकी जमाखोरी या कालाबाजारी न हो और किसी तीमारदार को परेशानी न उठानी पडे इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। इंजेक्शन मिल जाने के बाद भी अस्पताल किसी इसे बाहर से लाने को कह रहा है तो इसकी शिकायत विभाग से की जा सकती है।

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