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हिन्दी साहित्य भारती, उत्तराखण्ड के तत्वावधान में हिन्दी सप्ताह के अंतर्गत हुआ काव्य-गोष्ठी का आयोजन

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हिन्दी साहित्य भारती, उत्तराखण्ड के तत्वावधान में हिन्दी सप्ताह के अंतर्गत काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रभा पन्त की अध्यक्षता तथा प्रदेश महामंत्री डॉ कविता भट्ट “शैलपुत्री” के सफल संचालन में संपन्न गोष्ठी में लगभग दो दर्जन कवियों ने अपना काव्य पाठ किया।
मुख्य अतिथि हिन्दी साहित्य भारती के केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. रवींद्र शुक्ल ने अपने सम्बोधन में कहा कि संस्था हिन्दी के विकास और उत्थान के लिए कृत संकल्प है। उन्होंने कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा का सवैधानिक सम्मान दिलाना हिन्दी साहित्य भारती का सर्वोपरि लक्ष्य है। डॉ. शुक्ल ने कहा कि न केवल राष्ट्रीय स्तर पर अपितु वैश्विक स्तर पर भी हिन्दी सेवी, हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए, हिन्दी साहित्य भारती के माध्यम से जुट गए हैं। केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. रवींद्र शुक्ल ने कहा कि हिन्दी साहित्य भारती के संगठन का विस्तार जनपदों, महानगरों, नगर परिषदों तक किया जाएगा। डॉ. रवींद्र शुक्ल ने अपनी रचना ” मातृभूमि का चारण हूँ मैं, कवि का धर्म निभाता हूँ। अमर शहीदों की गाथा से सोये सिंह जगाता हूँ ” से सभी श्रोताओं के रोंगटे खड़े कर दिए।
कार्यक्रम की अध्यक्ष , एम० बी० स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्द्वानी की प्रोफेसर और हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभा पन्त ने हिन्दी भाषा के उत्थान और सम्मान के लिए हिन्दी साहित्य भारती के गठन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन से हिन्दी की देवनागरी लिपि को भी बहुत नुकसान हो रहा है। हिन्दी भाषी लोग भी हिन्दी को अंग्रेजी लिपि में लिख रहे हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। डॉ. प्रभा पन्त ने कहा कि यह बहुत सुखद लग रहा है कि हिन्दी साहित्य भारती केवल कविता ही नहीं, बल्कि लघु कथा, समालोचना, यात्रा वृतान्त, संस्मरण जैसी अन्य आधुनिक विधाओं पर भी कार्यक्रम आयोजित कर रचनाकारों को आगे बढ़ने के लिए मंच प्रदान कर रही है। डॉ. प्रभा पन्त ने अपनी रचना प्रस्तुत की- ” हिन्दी हूँ मैं, हिन्दी हूँ मैं। भारत माँ के माथे की बिन्दी हूँ मैं” ।
विशिष्ट अतिथि हिन्दी साहित्य भारती के केंद्रीय महामन्त्री और उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल शर्मा ने कहा कि राष्ट्रवादी विचारधारा वाले और राष्ट्र एवं समाजोपयोगी साहित्य का सृजन करने वाले साहित्यकारों को यथोचित सम्मान दिलाने का काम भी हिन्दी साहित्य भारती करेगी। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के अहिन्दी प्रदेशों में भी हिन्दी साहित्य भारती के मंच से जुड़कर स्थानीय विद्वान और साहित्यकार हिन्दी के प्रचार-प्रसार में लगे हैं। डॉ. अनिल शर्मा ने उत्तराखंड के सभी जनपदों में हिन्दी साहित्य भारती के गठन पर प्रसन्नता प्रकट करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र और प्रदेश महामंत्री डॉ. कविता भट्ट को बधाई दी। डॉ. अनिल शर्मा ने अपनी रचना पढ़ी- ” एक सूत्र में ये बाँधे सारे देश को, धन्य करे जन-जन को प्यारी हिन्दी”।
काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ कुसुम पन्त, देहरादून की सरस्वती वंदना “हे मेरी शारदे माँ, जीवन मे प्रीत भर दो” से हुआ। प्रदेश महामंत्री डॉ. कविता भट्ट ने केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. रवींद्र शुक्ल द्वारा रचित मातृ वन्दना ” हे मातृ भू तव वन्दना, हे भरत भू पद वन्दना” का गान किया। डॉ. कविता भट्ट ने अपनी सुंदर रचना “अन्ध श्रद्धा प्रेम मेरा तुम नेह बरसाते रहो, जेठ सा जीवन तपा मधुमास तुम आते रहो” पर खूब वाहवाही बटोरी। रुड़की से ही पंकज त्यागी “असीम” ने अपनी रचना प्रस्तुत की- हम सब की ज़ुबान है हिन्दी, फख्र ए हिंदुस्तान है हिंदी”।

देहरादून के डॉ. सत्यानन्द बडोनी ने पढ़ा- “हिन्दी बने राष्ट्र की भाषा, जन जन की है अभिलाषा”। चम्पावत के संजय भारद्वाज ने अपनी रचना प्रस्तुत की- ” हे शैलपुत्री, हे कात्यायनी तुमको नमन”।

प्रदेश महामन्त्री संगठन डॉ. के. आर. भट्ट ने उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुषमा को समर्पित रचना ” यह देवों की वाटिका, चहुँ ओर हरियाली है ” से सभी श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। नैनीताल से डॉ. अनुपम शुक्ल ने अपनी रचना के माध्यम से आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा- ” ये उजालों का सिलसिला यूँ ही चलता रहे, रोशनी का दिया एक देहरी पे जलता रहे “। पौड़ी से दिनेश चंद्र पाठक ने नारी शक्ति को समर्पित रचना पढ़ी- “तुम प्रभात की अर्चना, तुम आरती का दीप हो। भोर की पहली किरण तुम परम् पावन प्रीत हो”।
अल्मोड़ा से डॉ. मीनू जोशी की रचना को खूब दाद मिली- “ये कैसा अहसास कि जिसमें एक अलौकिक मीत मिले”। उत्तरकाशी से उषा जोशी ने पर्यावरण प्रदूषण पर मानव को जिम्मेदार बताते हुए कहा- ” स्वार्थवश किया मनुष्य ने प्रकृति से छल”।
पौड़ी से रोशन बलूनी ने पढ़ा- ” जला लो दीप द्वारे पे, अवध श्रीराम आये हैं”। रूद्रप्रयाग से नन्दन सिंह राणा ने अपनी रचना के माध्यम से भाईचारे का सन्देश दिया- *”मैं छोड़े और हम हो जाएं, मानव से मानव की प्रीत हो”*।

चमोली से भगत सिंह राणा ‘हिमाद’ ने पढ़ा- “जगत सिरमौर हो भाषा, मैं इसका गुणगान लिखता हूँ”। बागेश्वर से डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने माँ भारती की वंदना प्रस्तुत करते हुए पढा- ” जयतु जयतु हे भारत माता”। बागेश्वर से ही प्रशांत पाण्डेय ने आशावादी दृष्टिकोण के साथ पढ़ा- ” दैदीप्यमान हो आत्म अरुण तो निश्चित ही प्रकटेगी भोर “। हल्द्वानी से बीना जोशी ने खोमचे वाले की शैली में कविता पढ़कर सभी श्रोताओं को आनन्दित किया।

इनके अतिरिक्त टिहरी से अशोक क्रेजी और अनीता भट्ट, देहरादून से प्रबोध उनियाल, उत्तरकाशी से ज्योत्स्ना रतूड़ी, रूद्रप्रयाग से गंगा राम सकलानी, नैनीताल से डॉ. ओंकार नाथ पाण्डेय, अल्मोड़ा से मोती प्रसाद साहू, चम्पावत से डॉ. कीर्ति बल्लभ सकटा ने भी अपने सुंदर काव्य-पाठ से सभी का मन मोहा।
प्रदेश कोषाध्यक्ष सचिन प्रधान, संयुक्त महामन्त्री डॉ. एम. के. शर्मा और प्रदेश मंत्री बीना जोशी ने अतिथियों का सविस्तार परिचय कराया।
काव्य गोष्ठी में उपरोक्त के अतिरिक्त प्रदेश मीडिया प्रभारी ठाकुर मोहित सिंह, प्रदेश मंत्री डॉ. बसन्ती मठपाल, प्रदेश मंत्री डॉ. अर्पणा रावत, उत्तरकाशी जिलाध्यक्ष राजेश जोशी, महामन्त्री साधना जोशी, चम्पावत जिलाध्यक्ष जितेंद्र राय, जिलाध्यक्ष हरिद्वार अरुण शर्मा, महामन्त्री अलका शर्मा, जिलाध्यक्ष अल्मोड़ा नीरज पन्त, देहरादून जिला महामंत्री डॉ. सुनील दत्त थपलियाल, जिला महामन्त्री बागेश्वर मोहन चन्द्र जोशी, विभा तिवारी, आनन्दी नौटियाल, अशोक शर्मा, दीपा पाण्डेय, डॉ. जितेंद्र तिवारी, नीलम शर्मा, रामकृष्ण पोखरियाल, केशव दत्त जोशी, के0 एस0 रावत, ओमप्रकाश कन्नौजिया, पूनम चौधरी, रेखा चमोली, सरिता मैंदोला, अवनींद्र देव, सत्यप्रकाश ममगई, ममता शर्मा, अरुणिमा शर्मा, सविता शर्मा, शिल्पी शर्मा, आरती पुण्डीर, महेश चिटकारिया, नवीन भट्ट, पूनम जोशी, आयुष्मान पैन्यूली, उर्मिला सेमल्टी आदि अनेक साहित्यनुरागी उपस्थित रहे।
प्रदेश संयुक्त महामन्त्री डॉ. मीनू जोशी ने सभी अतिथियों, कवियों-कवयित्रियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया और काव्य गोष्ठी को बेहद सफल बताया।